मानसून से पहले की पहली बारिश में ही बह गई थी आदर्श की चमक

नगर परिषद के सलाहकार की “जल परीक्षण” हुई… और परिणाम आया — फ़ेल

जहाँ कागजों में नालियाँ चमक रही थीं, वहीं जमीन पर सड़कें तालाब बन गईं।
स्वागत गेट, टीन शेड और सफाई के दावे पहली ही बारिश में ऐसे बह गए जैसे ठेकेदार की ईमानदारी।

शहर में विकास कम, विकास अधिक दिखा।
नालियाँ साफ़ होने का दावा पानी में तैरते मिले।
जनता प्रश्न पूछ रही है – काम हुआ या सिर्फ बिल पास हुआ?

अब हाल ये है कि
जॉब से सबसे ज्यादा जरूरी नाव का अहसास हो रहा है।

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