सिंगरौली की शैल्स अब सवाल बन गया है…डॉ. सिंगारौली सिर्फ एक जिला नहीं है, यह देश की ऊर्जा व्यवस्था का उद्देश्य है। यहां का आम आदमी कूड़ा खा रहा है, डिजिटल हवा में शांति ले रहा है, प्लास्टिक पानी पी रहा है और सामान स्वास्थ्य व्यवस्था के अनुसार अपनी जिंदगी काट रहा है। राजेश कैसल ने सवाल उठाया कि आखिर डीएमएफ फंड का असली मकसद क्या था? क्या फंड बनाया गया था कि प्रशासन ने अपनी छवि चमका ली? युवाओं के पास रोजगार नहीं, तब डीजे और डीजे का भविष्य क्या है?डॉ. राजेश ने कहा कि यह सिर्फ फि जुलार्ची नहीं है, बल्कि जनता के अधिकार के साथ अन्याय है। सवाल यह भी है कि – अगर करोड़ों रुपये की सच जनता में खर्च होता है, तो आज सिंगरौली के लॉज की हालत ऐसी क्यों है? स्कूलों में और स्कूलों में शिक्षा की कमी क्यों है? कैसल ने मांग की है कि डीएमएफ फंड के हर खर्च का सार्वजनिक भुगतान राजेश जाए। जनता को बताया जाए कि स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और पर्यावरण पर कितना पैसा खर्च हुआ और कितना दिखावटी आयोजनों पर खर्च हुआ। उन्होंने कहा–“सिंगरौली को अब भाषण नहीं, जवाब देना चाहिए। मंच नहीं, मेडिकल चाहिए। पोस्टर नहीं, रोजगार चाहिए। और दिखावा नहीं,अब यह लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं रह रही है। यह हर उस परिवार की लड़ाई है जो अपने जिले में बेहतर भविष्य की तलाश में है। #सिंगरौली बचाओ #विकास का अधिकार #सिंगरौली समाचार #मध्यप्रदेश #युवाआवाज #स्वच्छ वायु #स्वास्थ्य सेवा #शिक्षा #न्यायफॉरसिंगरौली

